35 साल से कायम है सीमेंट का 15 फीट ऊंचा रावण,गांव की शासकीय भूमि की रक्षा के लिए बनाया गया था स्थायी रावण

जांजगीर चाम्पा जिले के चंडीपारा गांव की एक अनोखी परंपरा लोगों को हैरान भी करती है और आकर्षित भी,यहां दशहरा में जहां पूरे देश में रावण का पुतला जलाया जाता है,वहीं इस गांव में पिछले 35 सालों से एक स्थायी रावण खड़ा है
दरअसल,उस समय गांव की शासकीय भूमि को बचाने के लिए तत्कालीन पंचायत ने एक अलग तरीका अपनाया,हिंदू,मुस्लिम और सिख समाज के सरपंच और पंचों की सहमति से सीमेंट और कांक्रीट का करीब 15 फीट ऊंचा रावण बनाया गया,तभी से इस जगह का नाम पड़ा रावण भांठा,आज भी दशहरा से पहले इस प्रतिमा को रंग-रोगन कर सजाया जाता है और उसी मैदान में हर साल रावण दहन होता है,फर्क इतना है कि पुतला जलता है,लेकिन सीमेंट से बना स्थायी रावण वहीं खड़ा रहता है,चंडी दाई की नगरी चंडीपारा में नौ दिन तक नवरात्रि मनाने के बाद दशहरा का आयोजन बड़ी धूमधाम से किया जाता है,खास बात यह है कि यहां गढ़नुमा मंच बनाया गया है,जिस पर स्थानीय युवक दौड़कर चढ़ते हैं और उसके बाद ही रावण दहन होता है,इस मैदान को रावण भांठा कहा जाता है और यहां वर्षों तक बड़े-बड़े मेले भी लगे,लेकिन वक्त के साथ लोगों की सोच बदलने लगी और अब इसी जमीन पर धीरे-धीरे अतिक्रमण शुरू हो गया है,स्थानीय लोगों का कहना है कि यह परंपरा गांव की पहचान है,इसे सुरक्षित रखना बहुत जरूरी है,देश भर में दशहरा असत्य पर सत्य की जीत का पर्व माना जाता है,,लेकिन चंडीपारा की इस अनोखी परंपरा ने रावण को भी यहां स्थायी पहचान दे दी है।



