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साइबर ठगी में मदद करने वाले म्यूल अकाउंट गिरोह का भंडाफोड़, 5 आरोपी गिरफ्तार

जांजगीर-चांपा जिले की साइबर थाना पुलिस ने देशभर में साइबर ठगी करने वाले म्यूल अकाउंट गिरोह का बड़ा खुलासा किया है। पुलिस ने इस मामले में पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया है। आरोपियों पर कमीशन के लालच में अपने और अन्य लोगों के बैंक खाते साइबर ठगों को उपलब्ध कराने का आरोप है। मामले में एक बैंक कर्मचारी की भी गिरफ्तारी हुई है। पुलिस का कहना है कि जांच अभी जारी है और कई अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आ रही है।

पुलिस मुख्यालय रायपुर के निर्देश पर साइबर थाना जांजगीर-चांपा ने समन्वय पोर्टल से मिले इनपुट के आधार पर कार्रवाई की। तकनीकी जांच और बैंक खातों के लेनदेन की पड़ताल में पता चला कि कर्नाटक और महाराष्ट्र के तीन अलग-अलग साइबर ठगी मामलों में करीब 1 लाख 62 हजार 149 रुपये की ऑनलाइन ठगी हुई थी। यह रकम आरोपियों द्वारा उपलब्ध कराए गए बैंक खातों में ट्रांसफर की गई थी।
पुलिस ने इस मामले में हरिशंकर श्रीवास निवासी डोंगाघाट चौक तपसीद्वार चांपा, अनिल नामदेव उर्फ चेतन निवासी महादेव घाट हटवारा चौक चांपा, राजेश सोनी उर्फ रिंकू सोनी (30 वर्ष) निवासी धोबीपारा चांपा, संदीप सिंह ठाकुर निवासी परशुराम चौक चांपा और कमल विरानी निवासी बरपाली चौक चांपा को गिरफ्तार किया है।

पूछताछ में हरिशंकर श्रीवास ने बताया कि अनिल नामदेव और राजेश सोनी ने उसे 10 से 15 हजार रुपये कमीशन का लालच देकर बैंक खाता खुलवाया था। आगे की जांच में यह भी सामने आया कि संदीप सिंह ठाकुर और कमल विरानी ने भी अपने और अन्य लोगों के बैंक खाते खुलवाकर साइबर ठगों तक पहुंचाए। इन खातों का इस्तेमाल अलग-अलग राज्यों में ऑनलाइन ठगी की रकम मंगाने और आगे ट्रांसफर करने के लिए किया जाता था।
पुलिस के अनुसार, ऐसे बैंक खातों को म्यूल अकाउंट कहा जाता है। साइबर अपराधी इन खातों के जरिए ठगी की रकम इधर-उधर ट्रांसफर करते हैं ताकि उन तक पहुंचना मुश्किल हो जाए। कानून के मुताबिक, अपना बैंक खाता किसी दूसरे को इस्तेमाल करने देना भी अपराध है और ऐसा करने वाला व्यक्ति भी साइबर ठगी का आरोपी माना जाता है।

साइबर थाना पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी लालच में आकर अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, सिम कार्ड, ओटीपी, पासवर्ड या इंटरनेट बैंकिंग की जानकारी किसी के साथ साझा न करें। यदि किसी के साथ साइबर ठगी होती है तो तुरंत 1930 हेल्पलाइन पर कॉल करें और राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं। समय पर शिकायत करने से ठगी गई रकम वापस मिलने की संभावना बढ़ जाती है। पुलिस ने साफ किया है कि इस मामले में जांच जारी है और आने वाले दिनों में और भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं।

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