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जांजगीर में विशेष लोक अदालत सफल, 43 चेक बाउंस मामलों का हुआ समझौते से निपटारा, 95 लाख से अधिक का अवार्ड पारित

जांजगीर-चांपा जिला न्यायालय में शनिवार को चेक बाउंस मामलों के लिए विशेष लोक अदालत का सफल आयोजन किया गया। इस दौरान लंबे समय से लंबित मामलों का आपसी समझौते के जरिए निपटारा कराया गया। पूरे जिले में कुल 43 मामलों का निराकरण हुआ और 95 लाख 42 हजार 947 रुपये का अवार्ड पारित किया गया।


इस विशेष लोक अदालत का शुभारंभ छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा ने दंतेवाड़ा जिला न्यायालय से दीप प्रज्ज्वलित कर किया। उन्होंने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रदेश के सभी जिला न्यायालयों से जुड़े न्यायाधीशों को संबोधित करते हुए लोक अदालत को सफल बनाने का संदेश दिया। इसके बाद जांजगीर जिला न्यायालय में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सहअध्यक्ष की मौजूदगी में दीप जलाकर कार्यक्रम की शुरुआत हुई।

इस मौके पर जिला न्यायालय के सभी न्यायाधीश, जिला अधिवक्ता संघ के पदाधिकारी और अधिवक्ता, पुलिस एवं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के कर्मचारी, पैरालीगल वॉलिंटियर और बड़ी संख्या में पक्षकार मौजूद रहे। स्वास्थ्य विभाग की ओर से न्यायालय परिसर में स्वास्थ्य शिविर भी लगाया गया, जहां लोगों का निशुल्क स्वास्थ्य परीक्षण किया गया।

जिला विधिक सेवा
प्राधिकरण के अनुसार

जांजगीर जिला न्यायालय और सभी तालुका न्यायालयों में कुल 12 खंडपीठों का गठन किया गया था। इन खंडपीठों के समक्ष चेक अनादरण यानी चेक बाउंस के 787 मामले रखे गए, जिनमें से 43 मामलों का आपसी सहमति से निराकरण कराया गया। इन मामलों में कुल 95 लाख 42 हजार 947 रुपये का अवार्ड पारित किया गया।

लोक अदालत में कई ऐसे मामले भी सुलझे जो वर्षों से अदालत में लंबित थे। इनमें एक मामला सिर्फ 14 हजार 400 रुपये के चेक बाउंस का था, जो करीब तीन साल से चल रहा था। दोनों पक्षों के बीच कपड़े की दुकान के लेन-देन को लेकर विवाद था। परिवादी केवल आरोपी को सजा दिलाना चाहता था और समझौते के लिए तैयार नहीं था। लेकिन लोक अदालत की खंडपीठ ने दोनों पक्षों को बैठाकर समझाया कि अदालत की लंबी लड़ाई से केवल समय, पैसा और रिश्तों का नुकसान होता है, जबकि समझौते से विवाद हमेशा के लिए खत्म हो जाता है। इसके बाद दोनों पक्ष समझौते के लिए तैयार हुए और 14 हजार 400 रुपये का भुगतान कर मामला खुशी-खुशी समाप्त कर दिया गया।

इसी तरह 11 लाख रुपये के चेक बाउंस का एक बड़ा मामला भी लोक अदालत में सुलझ गया। यह मामला जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश (एफटीसी) मुकेश कुमार तिवारी की अदालत में लंबित था। पीठ ने दोनों पक्षों की काउंसलिंग कर उन्हें समझौते के फायदे बताए। बातचीत के बाद दोनों पक्ष 6 लाख रुपये में राजीनामा करने पर सहमत हो गए और वर्षों से चला आ रहा विवाद समाप्त हो गया।

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने कहा कि विशेष लोक अदालत का उद्देश्य लोगों को त्वरित, सस्ता और सरल न्याय उपलब्ध कराना है। आपसी सहमति से विवाद समाप्त होने से पक्षकारों का समय और धन दोनों बचते हैं, साथ ही रिश्तों में भी कटुता खत्म होती है। यही कारण है कि इस विशेष लोक अदालत को जिले में बड़ी सफलता के रूप में देखा जा रहा है।

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