जगदलपुर में अधिवक्ता परिषद का दो दिवसीय अभ्यास वर्ग संपन्न, न्याय और सामाजिक जिम्मेदारी पर हुआ मंथन

जगदलपुर। अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद की छत्तीसगढ़ प्रांत इकाई का दो दिवसीय अभ्यास वर्ग जगदलपुर में आयोजित किया गया। इसमें प्रदेश के अलग-अलग जिलों, तहसीलों और इकाइयों से अधिवक्ताओं एवं कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम में संगठन, न्याय व्यवस्था, सामाजिक जिम्मेदारी और राष्ट्रहित से जुड़े विषयों पर चर्चा की गई। कार्यक्रम की शुरुआत माँ भारती और माँ सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण, दीप प्रज्वलन और राष्ट्रगान के साथ हुई। उद्घाटन सत्र में अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद के क्षेत्र संयोजक प्रदीप सिंह, राष्ट्रीय महामंत्री भरत कुमार और राष्ट्रीय मंत्री विक्रम दुबे सहित वरिष्ठ पदाधिकारी मौजूद रहे। भरत कुमार ने अधिवक्ता परिषद के उद्देश्य और अभ्यास वर्ग की जरूरत पर बात रखते हुए कहा कि अधिवक्ताओं की जिम्मेदारी केवल न्यायालय तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज और राष्ट्र के प्रति भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है।

विक्रम दुबे ने अधिवक्ता परिषद के उद्देश्य एवं आगामी कार्ययोजना पर जानकारी दी। उन्होंने समाज के जरूरतमंद और पीड़ित लोगों तक न्याय पहुंचाने के लिए सक्रिय भूमिका निभाने पर जोर दिया।
अभ्यास वर्ग में बस्तर राजपरिवार के महाराजा कमलचंद्र भंजदेव भी शामिल हुए। उन्होंने बस्तर के इतिहास, संस्कृति और यहां की प्राचीन न्याय व्यवस्था के बारे में जानकारी दी।
दूसरे दिन कुटुंब प्रबोधन, स्वदेशी, सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण और नागरिक कर्तव्य जैसे विषयों पर चर्चा हुई। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ग्वालियर खंडपीठ के अतिरिक्त महाधिवक्ता दीपेंद्र कुशवाहा ने ‘कार्य, कार्यकर्ता और संगठन’ विषय पर संबोधित किया और संगठन के प्रति अनुशासन, समर्पण और सक्रियता के महत्व को बताया।
कार्यक्रम के दौरान संगठन के विभिन्न आयामों की बैठकें भी हुईं। आगामी कार्ययोजनाओं और संगठन के विस्तार को लेकर चर्चा की गई। इसके बाद जिज्ञासा समाधान सत्र में अधिवक्ताओं के सवालों का जवाब दिया गया।
समापन सत्र में वरिष्ठ अधिवक्ता भूपेंद्र राठौर ने संबोधित किया। आयोजन को सफल बनाने वाले जगदलपुर जिला इकाई के कार्यकर्ताओं और व्यवस्थाकारों को सम्मानित किया गया। जिला इकाई के अध्यक्ष अर्पित मिश्रा ने सभी अतिथियों, अधिवक्ताओं और कार्यकर्ताओं का आभार जताया।
दो दिवसीय अभ्यास वर्ग के माध्यम से अधिवक्ताओं को संगठन के साथ न्याय, सामाजिक जिम्मेदारी, संस्कार और राष्ट्रहित से जुड़े दायित्वों के प्रति जागरूक करने पर जोर दिया गया। कार्यक्रम का समापन ‘न्यायः मम धर्मः’ के ध्येय वाक्य के साथ हुआ।



