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राम नाम को अपने माथे में धारण की है और राम नाम का ही जाप करती है,,आइये देखते है एक खास रिपोर्ट में कौन है हीरौदी रामनामी देखिए एक खास खबर DADDU DABANG.INपर

अयोध्या में राम जी की मंदिर बन कर तैयार हो गया है और 22 जनवरी को राम लला की मूर्ति स्थापना की तैयारी चल रही है,,राम भक्तो के वर्षो का इंतजार अब ख़त्म होने वाला है,,लेकिन राम लला के मंदिर दर्शन का इंतजार एक और शबरी को है,,जो राम नाम को अपने माथे में धारण की है और राम नाम का ही जाप करती है,, जांजगीर चाम्पा जिला के नवागढ़ ब्लाक के खपरी गाँव में रहने वाली हीरौदी राम नामी को है,,आइये देखते है इस खास रिपोर्ट में कौन है हीरौदी रामनामी,,

वैसे तो राम भक्ति का हर किसी का अपना अपना तरीका है,, लेकिन जांजगीर चाम्पा जिले में नवागढ़ ब्लाक के खपराडीह गाँव में रहने वाला एक परिवार राम की भक्ति के लिए प्रसिद्ध है,,इस परिवार की तीन पीढ़ी राम नाम को अपने शरीर के कई अंगों में गोदवा कर अपनी पहचान रामनामी समाज में दर्ज करा ली है हीरौदी रामनामी ने बताया कि ससुर ने अपने शरीर में राम नाम लिखाया और पति भी पुते चहरे में राम नाम धारण कर रामनामी समाज का प्रतिनिधित्व कर समाज को आगे बढ़ाने का काम किया,,शादी के बाद बहु बन कर पहुंची तो अपने पति के शरीर में राम नाम को देख कर राम के प्रति आस्था बढ़ी और खुद भी अपने मस्तक में राम नाम का अमिट श्याही और तीन सुइयो की पीड़ा झेल कर राम नाम को धारण किया,,और राम नामी समाज में खुद को समर्पित कर दिया,,स्कूल का दहलीज नहीं देखने के बाद भी इन्हे राम नामी भजन मेला में शामिल हो हो कर रामायण के दोहा चौपाई भी याद हो गए है,,और घूँघरु की झंकार के साथ राम नाम का भजन करती है,,

वैसे तो जांजगीर चाम्पा सक्ति जिला,,सारंगढ और बिलाईगढ़ क्षेत्र में बहुतायत में है,,लेकिन धीरे धीरे बुजुर्गो के निधन होने के बाद अब इनकी जनसंख्या कम होती जा रही है,,युवा पीढ़ी स्कूल कालेज जाने की वजह से अपने शरीर में राम नाम नहीं लिखते,, लेकिन भजन में उपयोग आने वाले ओढ़नी और साफा में राम नाम लिखा कर धारण करते है और अपने दिल में राम को बसाए है,,राम नामी समाज का सबसे बड़ी बात यह भी है कि राम पर आस्था रखने के साथ सत्य,,अहिंसा को अपनाए है और नशा के साथ सामाजिक कुरीतियों से दूर राम नाम में ही रमे रहते है,,बेटी ने बताया कि राम नामी समाज किसी मूर्ति की पूजा नहीं करते,,लेकिन राम के प्रति आस्था रखते है उसके पिता ने राम नाम को अपने पूरे चहरे में धारण किया था,,उसके बाद भी उनकी सुंदरता अद्भुत थी,,उनके स्वर्गवास के बाद अब माँ ने भी राम नामी के हर भजन में शामिल होकर राम नाम का गुण गान करती है,,और अयोध्या में राम मंदिर बनने और अपने आराध्य राम की प्राण प्रतिष्ठा होने की ख़ुशी का इजहार करती है और अयोध्या जाने की इच्छा रखती है,,

मन में राम,,तन में राम रोम रोम में राम रे,,इसे चरितार्थ करते राम नामी समाज ने राम को अपने अंगों में सजा लिया है,,और कहते है राम नाम की लूट है लूट सके तो लूट अंत काल पछतायेगा जब प्राण जाएगा छुट,,

 

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