बारिश के बीच वन विभाग की बड़ी कार्रवाई 3 मकान ढहाए,विरोध के बाद रुकी अतिक्रमण हटाओ मुहिम

जांजगीर चांपा जिले के अफरीद मुड़पार गांव में शनिवार तड़के वन विभाग ने वन भूमि पर अतिक्रमण हटाने की बड़ी कार्रवाई की,,सुबह करीब 4 बजे डीएफओ के नेतृत्व में वन विभाग की टीम पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ गांव पहुंची,,जेसीबी की मदद से तीन मकानों को ध्वस्त कर दिया गया,,कार्रवाई की जानकारी मिलते ही ग्रामीण और जनप्रतिनिधि मौके पर पहुंच गए और विरोध शुरू हो गया,,विरोध बढ़ने पर जिला प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद कार्रवाई रोक दी गई,,अब प्रभावित परिवारों के सामने बरसात के मौसम में रहने का संकट खड़ा हो गया है।
वन विभाग के अनुसार अफरीद मुड़पार में वन भूमि पर अतिक्रमण कर मकान बनाए गए थे,,इन्हें पहले जमीन खाली करने के लिए नोटिस भी जारी किया गया था,,शनिवार सुबह वन विभाग की टीम भारी पुलिस बल,,फॉरेस्ट गार्ड और जेसीबी मशीन के साथ गांव पहुंची और तीन मकानों को हटाने की कार्रवाई शुरू कर दी,,सुबह-सुबह अचानक हुई इस कार्रवाई से गांव में अफरा-तफरी मच गई।
ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें नोटिस तो मिला था,,लेकिन स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने बारिश तक कार्रवाई नहीं होने का भरोसा दिलाया था,,इसी भरोसे के चलते उन्होंने घर खाली नहीं किया,,प्रभावित परिवारों का कहना है कि अब उनका घर टूट चुका है और बरसात के मौसम में छोटे-छोटे बच्चों के साथ रहने की चिंता सता रही है,,उनका सवाल है कि आखिर वे अब कहां जाएं।
कार्रवाई की सूचना मिलते ही जिला पंचायत उपाध्यक्ष गगन जयपुरिया और अन्य जनप्रतिनिधि मौके पर पहुंचे,,उन्होंने कलेक्टर से कार्रवाई रोकने की मांग की,,इसके बाद कलेक्टर के निर्देश पर चांपा एसडीएम मौके पर पहुंचे और वन विभाग को फिलहाल कार्रवाई रोकने के निर्देश दिए,,इसके बाद आगे की तोड़फोड़ रोक दी गई।
ग्रामीणों का कहना है कि वन विभाग ने जिन 18 परिवारों को अतिक्रमणकारी बताते हुए बेदखली का नोटिस दिया है,,उनमें से 7 मकान प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बने हैं,,ऐसे में लोगों का कहना है कि यदि उन्हें हटाया जाता है तो पहले उनके रहने की वैकल्पिक व्यवस्था की जाए,,उनका आरोप है कि बरसात के बीच इस तरह की कार्रवाई से परिवार बेघर हो जाएंगे।
फिलहाल वन विभाग की कार्रवाई पर रोक लगा दी गई है,,लेकिन नोटिस पाने वाले परिवारों की चिंता अभी भी खत्म नहीं हुई है,,एक ओर वन विभाग वन भूमि से अतिक्रमण हटाने की बात कह रहा है,,तो दूसरी ओर ग्रामीण और जनप्रतिनिधि प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और वैकल्पिक व्यवस्था की मांग कर रहे हैं,,अब सभी की नजर जिला प्रशासन के अगले फैसले पर टिकी हुई है।



