आइये जानते है कहाँ पर है छत्तीसगढ़ का कांसी वहा जाने से क्या क्या मनोकामनाएं होती है पूरी वहा एक ऐसा कुंड भी है जिसमें नहाने से छह रोगों से मुक्ति भी मिलती है देखिए एक खास खबर DADDU DABANG.INपर

आइये जानते है कहाँ पर है छत्तीसगढ़ का कांसी वहा जाने से क्या क्या मनोकामनाएं होती है पूरी वहा एक ऐसा कुंड भी है जिसमें नहाने से छह रोगों से मुक्ति भी मिलती है
जांजगीर चाम्पा जिला के खरौद नगर की प्राचीन और ऐतिहासिक महत्त्व रहा है,,आज भी इस नगर में विराजे शंकर का अपना अलग ही पहचान और मान्यता है,,यहां शिव जी की ऐसी लिंग है जिसे लंका विजय के बाद ब्रम्ह हत्या की पाँप काटने और छय रोग से मुक्ति पाने में लिए लक्ष्मण जी ने स्थापित किया,,जिसमे एक लाख छिद्र है,,और इसी छिद्र में गंगा यमुना और सरस्वती का संगम भी माना जाता है,,आइये जानते है कहाँ पर है छत्तीसगढ़ का कांसी,,
छत्तीसगढ़ के कांसी के नाम से प्रसिद्ध खरौद नगर का रामायण काल से जोड़ कर देखा जाता है,,खरौद याने रावण के भाई खर और दुषण ने नाम पर बसें नगर माना जाता है,,वन वास के दौरान दंडकरण्य क्षेत्र में रामचंद्र और लक्ष्मण जी ने समय बिताया,, और दंडकरण्य क्षेत्र में छत्तीसगढ़ के कई स्थानों के साथ शिवरीनारायण और खरौद भी शामिल है,,राम और रावण युद्ध के दौरान लक्ष्मण जी ने भी कई राक्षसों का वध किया और कई शस्त्रों के प्रहार झेले थे,,ब्रम्ह हत्या और शस्त्रों से हुए वार के कारण लक्ष्मण जी छय रोग से ग्रसित हो गए थे,,और इस रोग से मुक्ति पाने के लिए लक्ष्मण जी ने शंकर जी की आराधना की और एक लाख पार्थिव शिव लिंग की पूजा की,,जिसके बाद एक लाख छिद्र वाला स्वयं भू शिव लिंग निकला और लक्ष्मण जी रोग और पाप से मुक्ति पाये,,
खरौद के इस मंदिर में महाशिवरात्रि में शंकर जी की दर्शन करने और पूजा करने लाखो श्रद्धालुओं की भीड़ लगती है,,यहां धतूरा,, बेल पान के साथ अलग अलग फूल अर्पित करते है इसके अलावा मनोकामना पूर्ति के लिए चावल के एक लाख दाने अर्पित किया जाता है,,इस मंदिर में पूजा करने से विवाह योग्य युवतियों को सुन्दर वर,,जिनके बच्चे नहीं होते उनका बच्चा होना और लक्ष्मण कुंड में स्नान करने से रोग से मुक्ति मिलने की मान्यता है,,
खरौद के लक्ष्मणेश्वर शिव जी पहले खुले आसमान के नीचे स्थापित था,,मंदिर में कुछ शिलालेख मिले है जिसमे है हयवंशी वंशी राजा कोकल्य देव का जिक्र किया गया है,, जिनके 18 पुत्रो की उत्पत्ति और उनके पराक्रम के साथ शिव जी की स्तुति का उल्लेख है 8 वी शताब्दी में राजा खड़गदेव ने इस मंदिर का जीर्णोद्धार कराया,,अब इस मंदिर में देख रेख का जिम्मा पुजारियों का परिवार पर है,,मंदिर के पुजारियों ने अयोध्या में राम मंदिर स्थापना और राम चंद्र की पूर्ति स्थापना की खबर सुन कर काफी ख़ुश है और इस ऐतिहासिक मंदिर को 22 जनवरी को दीपो से सजाने की तैयारी में जुट गए है,,



