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मकर संक्रांति के दिन अगर आप घर में स्नान कर रहे है तो कैसे करके की अपको गंगा स्नान के बराबर ही पुण्य मिलें,,और इस दिन गुड़,,तिल और खिचड़ी क्यों खाया जाता है,,और क्यों करते है दान,,जानिए महत्व, पंडित जी ने क्या बताया


जांजगीर चांपा – मकर संक्रांति का त्योहार इस वर्ष 15 जनवरी 2024 को मनाया जाएगा. मकर संक्रांति का पर्व साल में एक बार मनाया जाता है. इस दिन तिल,,गुड़,, खिचीड़ी खाने और दान करने की भी परंपरा है
जांजगीर पुरानी सिंचाई कॉलोनी में स्थित दुर्गा मंदिर के पंडित बसंत शर्मा महाराज ने बताया कि मकर संक्रांति के दिन से सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण होते हैं. उत्तरायण को देवताओं का दिन कहा जाता है.मकर संक्रांति के दिन से दिन बड़ा और रात्रि छोटी होनी शुरु हो जाती है. मकर संक्रांति के दिन नदी में स्नान करने के बाद सूर्य देव की पूजा की जाती है और दान किया जाता है. मकर संक्रांति के दिन से ही खरमास खत्म हो जाता है और इसी दिन से शुभ और मांगलिक कार्यों के लिए मुहूर्त देखे जाने लगते हैं. और बताया की मकर संक्रांति के दिन तिल, गुड़, खिचड़ी खाने से लाभ मिलता है, इसके साथ ही तिल और गुड़ का लड्डू बनाकर उसके अंदर सिक्का या सोने का आभूषण डालकर दान करते है, और तिल के पहाड़ आकार का दान करते है, चावल दाल, सेमी मिलाकर दान करते हैं ये सभी दान करने से पुण्य होता है.
पंडित बसंत शर्मा महाराज ने बताया कि मकर संक्रांति के दिन से ही खरमास खत्म हो जाता है और इसी दिन से मांगलिक कार्य प्रारंभ होता हैं इसके कारण ही दान पुण्य और तीर्थ स्थल जाकर स्नान किया जाता हैं. अगर तीर्थ स्थल नही जा पाए तो मकर संक्रांति के दिन नदी या तालाब में स्नान जरूर करना चाहिए. अगर आप कही बाहर जाकर स्नान नहीं कर रहे है तो घर में ही टप या बाल्टी में जिस पानी ने अपको नहाना है उसमे थोड़ा था तिल और गंगाजल डालकर और उस जल को हाथ से छूटकर (टच करके) सात बार गंगा- गंगा (सप्त मोक्षदायनी) के कहने से के बाद उस जल में स्नान करने से गंगा स्नान के बराबर पुण्य मिलता है.
पंडित जी ने सप्त मोक्षदायनी मतलब बताया की “अयोध्या मथुरा मायाकाशी कांचीत्वन्तिका, पुरी द्वारावतीचैव सप्तैते मोक्षदायिका” अर्थात अयोध्या, मथुरा, हरिद्वार, काशी, कांचीपुरम, उज्जैन, द्वारिका इस सात जगह स्नान करने के बराबर पुण्य मिलता है.



