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राज्य एवं शहर

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के दौरे से चर्चा में आया राछा-पोड़ी का सत्य निज नाम आश्रम,जानिए कौन हैं बाबा कबड्डी दास और क्या है इस पंथ की मान्यता

जांजगीर चांपा जिले के नवागढ़ विकासखंड के राछा पोड़ी गांव में रविवार को मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रस्तावित दौरे को लेकर तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं,,गांव स्थित सत्य निज नाम आश्रम में आयोजित होने वाले सत्संग कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के साथ कई मंत्री और जनप्रतिनिधि शामिल होंगे,,इस दौरान हेलीपैड के पास बनाए गए शासकीय मंच से जिले में करोड़ों रुपये के विभिन्न विकास कार्यों का लोकार्पण और शिलान्यास भी किया जाएगा,,

मुख्यमंत्री के आगमन से पहले यह आश्रम और इसके संस्थापक बाबा कबड्डी दास एक बार फिर चर्चा का विषय बन गए हैं,,राछा-पोड़ी गांव के एक सामान्य परिवार में जन्मे बाबा कबड्डी दास का जीवन शुरू से ही धार्मिक प्रवृत्ति का रहा है,,गांव में आयोजित धार्मिक आयोजनों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में वे देवी-देवताओं की भूमिका भी निभाया करते थे,,लेकिन समय के साथ उनके विचारों में बड़ा बदलाव आया,,उन्होंने मूर्ति पूजा के बजाय आत्मचिंतन और आत्मा की आराधना को महत्व देना शुरू किया,,शुरुआत में उनके विचारों का गांव के कई लोगों ने विरोध किया और उनका उपहास भी उड़ाया,,कुछ लोगों ने उन्हें पागल तक कहा,,लेकिन उन्होंने अपने मार्ग से पीछे हटना स्वीकार नहीं किया,,बाबा कबड्डी दास ने अपने अभियान की शुरुआत नशामुक्ति से की,,उन्होंने सबसे पहले अपने परिवार और आसपास के लोगों को शराब,मांसाहार और अन्य दुर्व्यसनों से दूर रहने के लिए प्रेरित किया,,उनका मानना था कि समाज की अधिकांश समस्याओं की जड़ नशा और बुरी आदतें हैं,,धीरे-धीरे उनके विचार लोगों को प्रभावित करने लगे और बड़ी संख्या में लोग उनके अनुयायी बनते गए,,समय के साथ सत्य निज नाम का संदेश छत्तीसगढ़ से निकलकर अन्य राज्यों तक पहुंच गया और हजारों लोग इस विचारधारा से जुड़ गए,,आश्रम से जुड़े लोगों का कहना है कि बाबा कबड्डी दास अपने अनुयायियों से किसी प्रकार का धन या चढ़ावा नहीं लेते,,वे केवल लोगों से मांस,,मदिरा और अन्य दुर्व्यसनों का त्याग करने की शपथ दिलाते हैं,,इसके साथ ही पर्यावरण संरक्षण,,जीवों के प्रति दया और पशु बलि जैसी कुप्रथाओं को समाप्त करने का संदेश भी देते हैं,,सत्य निज नाम आश्रम के सचिव के अनुसार इस पंथ से जुड़ने के लिए किसी भी जाति,,वर्ग या समुदाय का व्यक्ति आ सकता है,,यहां किसी प्रकार का भेदभाव या बंधन नहीं है,,अनुयायियों को केवल अपनी बुरी आदतों का त्याग कर आत्मा की आराधना और आत्मशुद्धि के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी जाती है,,आश्रम की एक विशेष पहचान वहां स्थापित दर्पण भी है,,बताया जाता है कि यह दर्पण वर्ष में केवल एक बार 14 जुलाई को खोला जाता है,,उस दिन आश्रम के अनुयायी दर्पण में अपना प्रतिबिंब देखकर यह संकल्प लेते हैं कि जिस प्रकार बाहरी स्वरूप को स्वच्छ रखा जाता है,,उसी प्रकार आत्मा और विचारों को भी निर्मल बनाया जाए,,सत्य निज नाम आश्रम में समय-समय पर कई मंत्री,,विधायक,,जनप्रतिनिधि और विभिन्न क्षेत्रों के लोग बाबा कबड्डी दास का आशीर्वाद लेने पहुंचते रहे हैं,,लेकिन इस बार मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का दौरा होने के कारण आश्रम की गतिविधियों और इसकी विचारधारा को लेकर लोगों में विशेष उत्सुकता देखने को मिल रही है,,सत्य निज नाम आश्रम का मूल संदेश है कि “सत्य ही ईश्वर है और ईश्वर आत्मा में निवास करता है।” इसी विचार के साथ लोगों को लोभ,,मोह,,नशा और बुरी आदतों से दूर रहकर आत्मचिंतन,,आत्मसेवा और समाज सेवा के माध्यम से सुखमय जीवन जीने का संदेश दिया जाता है,,मुख्यमंत्री के आगमन से पहले राछा-पोड़ी गांव में उत्साह का माहौल है और प्रशासनिक तैयारियां भी अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं।

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