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राज्य एवं शहर

क्या आप जानते है कभी सुना है,,कि कोई मंदिर है,,लेकिन वहां किसी भगवान की मूर्ति की स्थापित ही नहीं है और ना ही वहा पर कोई पूजा भी नहीं होती है,,ऐसा कम ही जगह देखने और सुनने को मिलता है,,छत्तीसगढ़ के जांजगीर चांपा जिले के जांजगीर जाज्वलय देव की नगरी विष्णु मंदिर की है,,

कलचुरी कालीन शासक जाज्वलय देव प्रथम द्वारा जांजगीर मे विष्णु मंदिर की स्थापना की जा रही थी,,लेकिन मंदिर निर्माण के बाद भी इस मंदिर मे कोई प्रतिमा स्थापित नहीं की जा सकी,,और इस मंदिर के इसी अधूरे पन के कारण पुरातत्विक महत्त्व और भी बढ़ गया,,मंदिर के निर्माण सें जुडी कई प्राचीन किवदंति है जिसमे शिवरीनारायण के नर नारायण मंदिर का निर्माण की कहानी जुडी है,,किवदंति के मुताबिक जांजगीर भीमा तालाब के पास जाज्वलय देव और नर नारायण मंदिर निर्माण के लिए विश्वकर्मा जी द्वारा 6 मासी रात मे पूरा करना था और जो मंदिर पूरा होगा उस पर भगवान विष्णु की स्थापना होगी,,और दोनों ही मंदिर की कला देखने मे बेहद आकर्षक है,,कहते है दो मंदिरो को मिला कर जांजगीर का विष्णु मंदिर बनना था,,जिसे मूर्तिकारों ने अलग अलग स्थानों मे पूरा भी कर लिया लेकिन मंदिर को उठाने सें पहले ही समय समाप्त हो गई और शिवरीनारायण के मंदिर में नर नारायण भगवान की स्वयं भू मूर्ति स्थापित हुई और जांजगीर के मंदिर मे मूर्ति स्थापित नहीं हो पाई,,
साहित्य कार सतीश सिंह ने बताया कि इस मंदिर में मूर्ति नहीं होने के बाद भी विष्णु मंदिर कहे जाने का कारण यहां मंदिर का पूर्व भिमुख होना है,,इस तरह की प्राचीन मंदिर कोणार्क में है जहाँ सूर्य की पहली किरण मंदिर के ऊपरी हिस्से से होकर विष्णु जी के नाभि तक पहुँचती है और नाभि से ही बम्हा जी की उत्पत्ति हुई है, इसके अलावा जांजगीर विष्णु मंदिर के बाहरी हिस्से में बने भगवान विष्णु के अवतारो का चित्रण इस मंदिर की विष्णु मंदिर के रूप में पहचान दिलाती है,
मंदिर के दो हिस्से, अभी भी नीचे में बिना मूर्ति के खड़ा है,
विष्णु मंदिर के ऊपरी हिस्सा आज भी गुम्बद नहीं लगा है इसका कारण यह माना जाता है कि इस मंदिर के ऊपर एक मंदिर और स्थापित होना था, जिसे भी लगभग पूरा कर लिया गया था लेकिन किसी वजह से इसको ऊपर स्थापित नहीं कर पाए,,और दोनों मंदिर आज भी अपने अपने स्थान पर सुरक्षित रहे हुए है,,
भीम ने बनाया था भीमा तालाब
साहित्यकार सतीश सिंह ने बताया कि जांजगीर के इस स्थान में एक विशाल काय तालाब है जिसे भीमा तालाब कहते है,,इसके पीछे भी कहानी प्रचलित है,,जिसमें अज्ञात वास के दौरान पांडव ने कुछ समय इस क्षेत्र में बिताये और भीम ने इस तालाब की खुदाई की,,इस तालाब की आकृति गोलाई में होने के बजाय चतुर्भुज के सामान है, कहते है भीम ने अपने एक मुक्का मार कर इस तालाब की खुदाई की है,,
मंदिर को सुरक्षित रखने पुरातत्व विभाग सतर्क
12 वी शताब्दी के इस मंदिर को काल और समय के अनुसार उस तरह संरक्षित नहीं किया जा सका जिसके कारण मंदिर के आसपास की मूर्ति छति ग्रस्त हो गई, मंदिर में लगे मूर्तियों में भी छरण होने लगा लेकिन अब इस पर पुरातत्व विभाग ने अब इस संरक्षण किया है वही जिला प्रशासन इस मंदिर को पर्यटन के नक्सा में आगे बढ़ाने के लिए हर वर्ष जाज्वलय देव लोक कला महोत्सव का आयोजन करती है,

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