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चेन्नई के बाद मगरमच्छ पार्क कही स्थापित है तो वो हो जांजगीर चाम्पा जिले का कोटमी सोनार गाँव

चेन्नई के बाद मगरमच्छ पार्क कही स्थापित है तो वो हो जांजगीर चाम्पा जिले का कोटमी सोनार गाँव, जहाँ गाँव के 85 एकड़ के मुड़ा तालाब मे 3सौ से अधिक मगरमच्छ एक साथ रहते है, वही तालाब के तापू मे विदेशी पक्षियों का भी आना जाना है, छत्तीसगढ़ शासन ने इस मगरमच्छ पार्क को 2006 मे बनाया, सबसे ख़ास बात यह है कि इन मगरमच्छ को कहीं बाहर से नहीं बल्कि इसी गाँव के अलग अलग तालाबों से इकट्ठा कर मुड़ा तालाब मे छोड़ा गया है,,,
जांजगीर चाम्पा जिले का कोटामी सोनार गाँव को मगरमच्छ ने अलग ही पहचान दिलाई है,, इस गाँव मे मगरमच्छ कब और कहाँ से आए इस बात कि जानकारी किसी को नहीं है लेकिन गाँव के प्रदीप सोनी बताते है कि गाँव मे लगभग दर्जन भर से अधिक तालाब है जहाँ लोगो का निस्तारी भी होता है, वही इन सभी तालाबों मे मगरमच्छ भी वास करते आ रहे थे,कभी कोई जन हानि नहीं हुए, लोग बड़े ही सहजता के साथ नहाने के साथ मवेसियो को यहां पानी पिलाने लाते थे, और कभी कोई दुर्घटना नहीं हुई,, लेकिन 2005 मे मगरमच्छ ने एक बच्ची को अपना शिकार बनाया और लोग दहशत मे आ गये, जिसके बाद वन विभाग ने राज्य सरकार को मगरमच्छ कि जानकारी राज्य सरकार को दी और मगरमच्छ अभ्यारण कि शुरुआत हुई,
गाँव के लोग मगरमच्छ को मानते है देवता,
पुराने ज़माने से लेकर अब तक कोटमी सोनार गाँव के लोग मगरमच्छ को आस्था के साथ देखते है, गाँव के दिनेश सिंह बताते है कि यहां इंसान और मगरमच्छ एक दूसरे के पूरक थे, जिस तालाब ने लोगो का गुजर बसर होता था उसमे मगरमच्छ भी बड़ी सहजता के साथ रहते थे, लोग इनको पूजा भी करते है, वही अब इन्ही मगरमच्छ के कारण गाँव का नाम देश भर मे फ़ैल गया है और हर साल पर्यटको कि भीड़ बढती जय रही है,,
गाँव के लोगो को प्रशिक्षण देकर किया गया मगरमच्छ कि शिफ्टिंग
कोटमी सोनार गाँव के लोग का कहना है कि गाँव के मुड़ा तालाब मे क्रोकोड़ाईल पार्क स्थापित होने मे तत्कालीन कलेक्टर सोनमणि बोरा की अहम् भूमिका रही है,क्योंकि 85 एकड़ के मुड़ा तालाब को खाली करना और उसे झील का स्वरुप देने के लिए उन्होंने जन मानस को जोड़ा और तालाब मे श्रम दान कर जिले भर के लोगो ने अपना योगदान दिया, जिसके बाद गाँव के युवाओ को क्रोकोड़ाईल रेस्कयू के लिए प्रशिक्षण भी दिलाया गया और उन्ही प्रशिक्षित युवाओ ने गाँव के तालाबों से 100 मगरमच्छ को रिस्कयु कर मुड़ा तालाब मे शिफ्ट किया और जाली दार तार से घेर कर उन्हें बाहर निकलने से रोका,,
प्रजनन के लिए है अनुकूल वातावरण
कोटमी सोनार के तालाबों मे वैसे तो पहले से ही मगरमच्छ रहते आ रहे है, लेकिन मुड़ा तालाब मे सैकड़ो मगरमच्छ के लिए यहां का वातावरण अनुकूल है, जिसके कारण मगरमच्छ की वंश वृद्धि होती जा रही है,
अंडा देने का समय है अभी, गरज के बाद अंडा से निकलेगा बच्चा,
क्रोकोड़ाईल पार्क में कई टीला और टापू बने है जहाँ मगरमच्छ प्रजनन करते है और मार्च अप्रेल माह में तालाब के किनारे अंडा देती है, और अंडा को सुरक्षित रखने के लिए मगरमच्छ तालाब के उपरी सतह में ही रहते है और मई जून माह में गरज के साथ होने वाली बारिश से अंडा फूटता है और मगरमच्छ के बच्चे बाहर आते है,, लेकिन अधिकांश बच्चे दूसरे मगरमच्छ का शिकार बन जाते है,
बरसात में अभी भी मिलते है गाँव की गली में मगरमच्छ
कोटमी सोनार गाँव में क्रोकोड़ाईल पार्क में सैकड़ो क्रोकोडायल है और बारिश के दौरान कई बार गाँव की गलियों में छोटे छोटे क्रोकोड़ाईल दिखाई देते है, जिसे गाँव के लोग पकड़ कर तालाब में डाल देते है,वही वन विभाग में क्रोकोड़ाईल के विषय में लोगो को जानकारी देने के लिए पार्क एरिया में प्रशिक्षण केंद्र की भी स्थापना की गई है, जिसे देख कर आम लोग भी मगरमच्छ की जानकारी आसानी से ले सकते है,

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