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10 वर्ष की गुरू और अपने से कम उम्र की छोटे सी शिष्या का कत्थक नृत्य का अनोखा प्रदर्शन

10 वर्ष की गुरू और अपने से कम उम्र की छोटे सी शिष्या का कत्थक नृत्य का अनोखा प्रदर्शन

स्वतंत्रता दिवस की शाम जांजगीर चाम्पा जिला के कई स्थानों मे देश भक्ति का कार्यक्रम आयोजित किया गया और चाम्पा के एक छोटे से कालोनी मे जो देखने को मिला निश्चित ही हैरान करने वाला और कला की साधना का अनूठा संगम देखने को मिला,,यहां 10 वर्ष की कत्थक शिक्षिका ने अपनी उम्र और छोटे बच्चियों को कत्थक सीखा कर अपने मोहल्ले के कार्यक्रम मे प्रस्तुति दी,,और दर्शकों ने बच्चो की प्रतिभा का जम कर तारीफ की,,15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस का जश्न वैसे तो हर कोई अंदाज मे मनाता है,, लेकिन चाम्पा की रहने वाली शार्वी इस जश्न को अपने शिष्यों को साथ मनाई और गुरु शिष्य मिल कर देश भक्ति गीतों मे नृत्य कर शमा बाँध दिया,,शार्वी ने बताया कि भिलाई के कत्थक स्कूल से 4 साल कि उम्र से तालीम लीं,,और छत्तीसगढ़ के अलावा कई बड़े शहरों मे अपनी प्रस्तुति दी है,,और पहला स्थान प्राप्त हुआ है,,शार्वी ने बताया कि अभी उसने तालीम लेकर कत्थक मे पारंगत पा लीं है लेकिन एक साल बाद उसकी पहली परीक्षा हो पायेगी,,लेकिन अभी से अपनी सहेलियों को उसने कत्थक सीखना शुरु कर दी है,,अपनी नन्ही टीचर के पास सीख कर खुश है,,और आजादी का जश्न गुरु शिष्य मिल कर मनाया,,छोटे से मंच मे अपनो के बीच थिरकते बच्चों की प्रस्तुति देख कर दर्शक भाव विभोर हो गए,, वही आयोजन समिति ने भी शार्वी द्वारा अपने साथियो को कत्थक सीखा कर विलुप्त होती संस्कृति से रुबरु कराना बताया,,उन्होंने कहा कोई भी कला बुरा नहीं होता लेकिन अपनी संस्कृति और संस्कार को समझने के लिए कत्थक,,भारत नाट्यम,,ओड़िसि जैसे कला को सीखने से बच्चो मे भारतीय सस्कृति को समझने का अच्छा मौका मिलता है,,शार्वी और उसके शिष्यों की नृत्य शैली देख कर ख़ुशी का इजहार किया,,जिस उम्र मे बच्चे खिलौना और मोबाइल मे अपना समय बिताते है,,उस उम्र मे शार्वी ने कत्थक की साधना की और अपनी सहेलियों को भी कत्थक नृत्य शैली से रूबरू कराया और अपने ग्रुप के प्रस्तुति से सब का मन मोह रही है,,

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