आखिरकार क्या वजह है की क्यों नही आते मुख्यमंत्री अकलतरा विधानसभा श्राफ या ?
आखिर क्यों नही आते मुख्यमंत्री अकलतरा विधान सभा श्राफ या अभिशाप

आखिरकार क्या वजह है की क्यों नही आते मुख्यमंत्री अकलतरा विधानसभा श्राफ या ?
चुनाव चाहे कोई भी हो हर चुनाव में किसी की हार किसी की जीत होती है,,लेकिन जांजगीर चाम्पा जिला में एक ऐसा विधानसभा सभा है जहाँ आने से मुख्यमंत्री भी डरते है और अगर मुख्यमंत्री अकलतरा विधानसभा की सरहद में भी आ गए तो उनका मुख्यमंत्री पद जाना तय माना जाता है,,और विपक्षी नेता का दौरा उसे मुख्यमंत्री तक पहुँचाता है अकलतरा विधानसभा ऐसा क्यों कहते है और क्या है इससे जुडी रोचक तथ्य जानते है अकलतरा के समाज सेवी रवि सिसोदिया से,,
पहले जानते है वर्तमान परिस्थिति
अकलतरा विधानसभा सभा में इस बार भाजपा ने सौरभ सिंह को अपना प्रत्याशी बनाया,,कांग्रेस ने राघवेद्र सिंह,,बसपा ने विनोद शर्मा JCC ने ऋचा जोगी और AAP ने आनंद मिरी को प्रत्याशी बनाया,,इनके साथ अन्य 11 प्रत्याशी चुनावी मैदान में थे,,इस बार बीजेपी के स्टार प्रचारक के रूप में असम के मुख्यमंत्री विसशर्मा,AAP पार्टी के प्रचार के लिए दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल और पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान प्रचार में पहुचे,,लेकिन कांग्रेस के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ना तो चुनाव प्रचार में आए और ना है भरोसा का सम्मलेन में अकलतरा पहुचे,,अकलतरा में विधानसभा में कांग्रेस के प्रत्याशी के चुनाव प्रचार करने छत्तीसगढ़ के डिप्टी सी एम टी एस सिंहदेव नरियरा गाँव पहुचे थे और राघवेद्र सिंह को जीताने का आग्रह किया था,,और चुनाव परिणाम भी राघवेन्द्र सिंह के पक्ष में आया कांग्रेस के राघवेन्द्र सिंह ने बीजेपी प्रत्याशी सौरभ सिंह को 22 हजार मतों से हराया लेकिन दूसरी ओर डिप्टी सीएम टी एस सिंहदेव हार गए और प्रदेश में कांग्रेस सत्ता से बाहर हो गया,,
आखिर क्यों CM मानते है अकलतरा को अपसगुन
जांजगीर चाम्पा जिला के इतिहास के बारे में राजनितिक विश्लेषक रवि सिसोदिया मानते है कि भारत कि आजादी के बाद से अकलतरा विधानसभा सभा कांग्रेस का गढ़ रहा है,,यहां स्वतंत्रता संग्राम के नायक और संविधान परिषद के सदस्य ठाकुर छेदी लाल बैरिस्टर कि जन्म भूमि रही है,,जिसके कारण अकलतरा स्वतंत्रता संग्राम में प्रमुख केंद्र रहा,,भारत की आजादी के बाद अविभाजित माध्यम प्रदेश से ठाकुर छेदी लाल बैरिस्टर को मुख्यमंत्री बनना तय था ठाकुर छेदी लाल बैरिस्टर सरदार बल्ल्भ भाई पटेल के करीबी माने जाते थे,,कांग्रेस की अंदरूनी कारणों से इन्हे मुख्यमंत्री नहीं बनाया गया,,जिसके बाद बैरिस्टर साहब कांग्रेस छोड़ कर अलग पार्टी से चुनाव लड़े,, और उनकी हार हुई,,समय बीतता गया और अकलतरा से आर के सिँह,,धीरेन्द्र सिंह और डॉ राकेश सिंह कांग्रेस से विधायक बने 1990 के बाद अकलतरा के तासीर बदला और बीजेपी के साथ बसपा भी जीत हासिल की और अब 23 में फिर से कांग्रेस की जीत हुई है
कब कब आए सी एम और क्या हुआ परिणाम
1959 में कैलाश नाथ काटजू अकलतरा रेलवे स्टेशन में अपने साथियो से मिलने आए और चाय पी थी,,अकलतरा स्टेशन में चाय की चुस्की उनके मुख्यमंत्री कार्य का आखरी चुस्की थी उसके बाद मुख्यमंत्री पद में नहीं बैठे,,
1973 में मुख्यमंत्री प्रकाश चंद सेठी भी अकलतरा आए और यहां से जाने के बाद मुख्यमंत्री पद से हाथ धो बैठे,,इतना ही नहीं 2003 में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री अजित जोगी भी अकलतरा में सभा की और उन्हें भी मुख्यमंत्री पद नहीं मिला और 15 साल तक मुख्यमंत्री रहने के बाद डाक्टर रमन सिँह भी 2018 में अकलतरा विधानसभा के कार्यक्रम शामिल हुए जिसके बाद उन्हें मुख्यमंत्री पद से हाथ धोना पड़ा,,
संकल्प शिविर में नहीं पहुचे थे भूपेश
- 2022 में छत्तीसगढ़ में कांग्रेस द्वारा सभी 90 सीटों में संकल्प शिविर का आयोजन किया गया था,,अकलतरा भी उसमे शामिल था,,सभी विधानसभा में भूपेश बघेल पहुचे लेकिन अकलतरा विधानसभा में आयोजित संकल्प शिविर से भूपेंश बघेल ने दूरी बनाई,,जो चर्चा का विषय रहा,,अंततः विधानसभा सभा चुनाव के दौरान उप मुख्यमंत्री टी एस सिंह देव ने अकलतरा विधानसभा के नरियरा गाँव में चुनावी सभा को सम्बोधित किया और खुद अपने विधानसभा से हारे और प्रदेश में कांग्रेस की सरकार भी नहीं रही,



