अंतराष्ट्रीय सूर्यांशा शिक्षा महा महोत्सव का आयोजन,,स्वास्थ्य,, शिक्षा,,कला,,और ज्ञान को जीवन का मानते है आधार

अंतराष्ट्रीय सूर्यांशा शिक्षा महा महोत्सव का आयोजन,,स्वास्थ्य,, शिक्षा,,कला,,और ज्ञान को जीवन का मानते है आधार
जांजगीर चाम्पा जिला के सिवनी गाँव में अंतराष्ट्रीय सूर्यांशा शिक्षा महा महोत्सव का आयोजन किया गया है 23 दिसंबर से प्रारम्भ हुए महोत्सव में देश के अलग अलग स्थानों से समाज के बडे पदों में आसीन लोग पहुचे और शिक्षा के महत्त्व को बताया,, 27 दिसंबर तक आयोजित होने वाले इस महोत्सव के माध्यम से सूर्यबंशी समाज ने स्वास्थ्य,, शिक्षा,,कला और सामाजिक समरसता को बनाए रखने का पहल किया है,,
ज्ञान को जीवन का मानते है आधार
जांजगीर चाम्पा जिला के सिवनी गाँव में खास मेला महोत्सव का 9 साल से आयोजन किया जा रहा है, यह मेला महोत्सव दूसरे मेला की से अलग इसलिए भी है कि यहां आने वाले लोग शिक्षा के प्रति समर्पित होते है और समाज को शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते है,,आयोजन समिति ने ज्ञान को ही जीवन का मुल आधार बताया है,,और आयोजन स्थल में लोगो को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने के लिए स्वास्थ्य केम्प,, सामूहिक विवाह और PSCपेटर्न पर टेस्ट,, और शिक्षा से जुड़े कार्यक्रम का ही आयोजन करते है,,
विदेशो से भी वर्चुअल जुड़ते है सामाजिक लोग
सूर्यबंशी समाज ने पहले इसे सामाजिक युवा को शिक्षा के क्षेत्र मे आगे बढ़ाने के उद्देश्य से प्रारम्भ किया लेकिन अब इस महोत्सव में दूसरे समाज के जुड़ाव के बाद सर्व समाज को शामिल किया और यहां साल भर पी एस सी की निःशुल्क प्रशिक्षण दिया जाता है और प्राथमिक स्कूल के माध्यम से बच्चो को स्कूल से जोड़ा जा रहा है,,आयोजन समिति का दावा है कि सूर्यांश शिक्षा में प्रशिक्षण प्राप्त कर कई बच्चे बड़े बड़े प्रतियोगी परीक्षा में सफलता हासिल की है,,यह संस्थान समाज के उन लोगो के सहयोग से चल रहा है जो अपने पैरो में खड़े हो गए है,,
सूर्यांश शिक्षण समिति द्वारा ज्ञान को जीवन का आधार माना गया है और इसके लिए पुस्तक की पूछा की जाती है इसके अलावा आजादी से पहले समाज में शिक्षा की अलख जगाने वाले पांच गुरुओ की आराधना की जाती है, उन पंच गुरुओ को देव के तुल्य मानते है,,पंच गुरुओ में सहस राम देव,,मालिक राम देव,, मोहर साय देव, देवमन देव और सखा राम देव प्रमुख है,,जिन्होंने समाज के लोगो को घर घर जाकर पीढ़ा पाठ के माध्यम से शिक्षा देते थे,,समाज के लोगो ने आजादी के बाद भी सामाजिक स्तर में शिक्षा को महत्त्व नहीं मिलने की पीड़ा को बताया आउट अब अपने समाज के साथ गाँव के अंतिम व्यक्ति को भी शिक्षा देना अपना उद्देश्य बना लिया है,,
सिवनी जैसे छोटे से गाँव में शिक्षा को प्रमुख मान कर किया जाने वाला अंतरराष्ट्रीय सूर्यांश शिक्षा महोत्सव आज लोगो के लिए प्रेरणा श्रोत बन गया है, इस लिए इस कार्यक्रम के शामिल होने के लिए छत्तीसगढ़ ही नहीं बल्कि दूसरे प्रदेश और दूसरे देश में रहने वाले सामाजिक लोग शामिल होने आते है और कई लोग वर्चुअल जुड़ कर समाज के लोगो को ज्ञान बढ़ाने के लिए प्रेरित करते है,,



