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आज दूसरे दिन भी भू विस्थापितो की जंग जारी प्लांट के सामने ही खाना बनाकर लड़ रहे है जंग प्लांट प्रबंधक के अड़ियल रवैया से जिला प्रशासन भी मैनदेखिए एक खास खबर DADDU DABANG.IN पर

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जांजगीर चाम्पा जिला के नरियरा में संचालित केएसके महानदी पावर प्लांट के प्रबंधन की मनमानी कम होने का नाम नहीं ले रहा है,,प्लांट प्रबंधन द्वारा भू विस्थापितो की 23 सूत्रीय मांगो पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं करने के कारण भू विस्थापितो का आंदोलन दूसरे दिन भी जारी है,,भू विस्थापितों ने अपनी मांग पूरी नहीं होने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है,,
जांजगीर चाम्पा जिला में संचालित केएसके महानदी पावर प्लांट का विवादों से गहरा नाता है,,प्लांट स्थापना के साथ ही भू विस्थापित मुआबजा,, नौकरी की मांग के साथ प्लांट प्रबंधन द्वारा 11 गाँव के निस्तारी रोकदा डेम को पाटने का आरोप लगाते हुए आंदोलन करते आ रहे है,,इस बार भू विस्थापितो ने 23 सूत्रीय मांगो को लेकर रविवार से प्लांट के मुख्य गेट के सामने धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया है,,रविवार को प्लांट प्रबंधन ने भू विस्थापितो से चर्चा नहीं की तो आंदोलन कारियों ने सोमवार से प्लांट से तीन अन्य गेट में भी बैठ गए है और मजदूरों को प्लांट से आने जाने नहीं दे रहे है,,वही प्लांट के अंदर ट्रकों के प्रवेश नहीं लगने के कारण ट्रकों की लम्बी कतार लग गई है,,भू विस्थापितो ने प्लांट प्रबंधन पर तानाशाही रवैया अपनाने का आरोप लगाते हुए नदी से पानी और रेल मार्ग को भी रोक कर प्लांट में कोयला लाना भी रोकने की योजना बनाई है,,
केएसके महानदी पावर प्लांट के मुख्य द्वार पर मजदूरों ने आंदोलन से पहले जिला प्रशासन से गुहार लगाते हुए अपनी मांग पूरी करने का लिखित आवेदन किया था,,जिसके परिणाम स्वरुप जिला प्रशासन ने प्लांट प्रबंधन और भू विस्थापितो के साथ मिल कर प्रभावितो का सर्वे कराया और 10 फ़रवरी तक प्रकरणों का निपटारा करने के निर्देश दिए थे लेकिन प्लांट प्रबंधन ने जिला प्रशासन के आदेश को अनसुना कर मामले में चर्चा करने तक नहीं आ रहे है,,जिसके कारण जिला प्रशासन भी भू विस्थापितों पर कड़ाई करने से बच रहा है और लॉ एन्ड आर्डर की स्थिति निर्मित ना हो इस लिए मजिस्ट्रेट और पुलिस तैनात है,,
एशिया का सबसे बड़ा पावर प्लांट केएसके महानदी पावर प्लांट के खुलने से क्षेत्र के लोग खुश थे,,लेकिन प्लांट लगने के 11 साल बाद भी लोगो को जमीन का मुआबजा नहीं मिला और ना ही जमीन के बदले नौकरी मिली,,कुछ समय तक प्रभावितो को पेशन दिया गया और अब उसे भी बंद कर दिया गया है,,प्लांट गोद ग्रामो का विकास में भी ध्यान नहीं दे रही है,,जिसके कारण भू विस्थापित अब आर पार की लड़ाई के लिए तैयार है और धरना स्थल पर भी खाना बना कर पेट की आग बुझा रहे है और प्लांट प्रबंधन के खिलाफ नारे बाजी कर रहे है,,





