जिले मे एक गाँव ऐसा है जहाँ होली के पांचवे दिन रंग पंचमी को लाखो की संख्या मे जुड़ते है हजारों शिवभक्त,चांदी की पालकी में सवार होगे शिवजी,देशभर के नागा साधु होगे बाराती देखते रही एक खास खबर DADDU DABANG.IN पर

जिले मे एक गाँव ऐसा है जहाँ होली के पांचवे दिन रंग पंचमी को लाखो की संख्या मे जुड़ते है हजारों शिवभक्त चांदी की पालकी में सवार होगे शिवजी,देशभर के नागा साधु होगे बाराती
जांजगीर चाम्पा जिले मे एक गाँव ऐसा है जहाँ होली के पांचवे दिन याने रंग पंचमी को लाखो की संख्या मे जुड़ते है,,यहां मेला और संत समागम होता है और निकलता है शिवजी की बारात,,जी हाँ मंदिर से चांदी की पालकी मे सवार होकर पंचमुखी महादेव अपने श्रद्धांलुओं के साथ निकलते है और नागा साधु वैष्णव संत मिलकर इस बारात मे शामिल होते है,,इस नजारा को देखने के लिए लोगो को साल भर से इंतजार रहता है
हम बात कर रहे है नवागढ़ ब्लाक के पीथमपुर गाँव ने बसें कलेश्वर नाथ बाबा की,, इस मंदिर की मान्यता है कि शिव लिंग स्वयं भू है और इसके द्वार पर मांगी गई हर मांग पूरी होती है,,सावन माह भर,,शिवरात्रि मे शिव जी का विशेष पूजा और श्रृंगार किया जाता है लेकिन रंग पंचमी के दिन स्वयं भोले नाथ अपने श्रद्धालुओं के बीच पहुंचते है और उनकी मनोकामना पूरी करते है,,
100 साल से भी अधिक समय से निकलती है शिव बारात
बाबा कलेश्वर नाथ के मंदिर से शिव बारात कब से निकल रही है इस पर जानकारो का मानना है कि सन 1920 से शिव बारात निकाली गई,, और चाम्पा जमींदार इस परम्परा का आज भी निर्वहन करते आ रहे है,,
नागा साधु का शौर्य प्रदर्शन और शाही स्नान होता है आकर्षण का केंद्र
हसदेव नदी के तट मे बसें पीथमपुर गाँव मे पंचांग के हिसाब से इस बार 30 मार्च को रंग पंचमी मनाया जाएगा,,पीथमपुर मे निकलने वाली शिव बारात कि तैयारी शुरु कर दी गई है,,नागा साधुओ का आगमन शुरू हो गया है,,और मेला के लिए भी तैयारी की जा रही है
बारात मे निकलने वाली चांदी की पालकी कक वजन डेढ़ क्विंटल
बाबा कलेश्वर नाथ की बारात मे सबसे आकर्षक दूल्हा याने भोले भंडारी और उनका पालकी ही होता है,, जानकारो के मुताबिक इस पालकी को
1930 के दशक मे राजा दादू राम शरण सिंह के समय रानी उपमा कुमारी ने चांदी की पालकी बनवाई थी,,मंदिर परिसर मे रहते समय उन्हे किसी विद्वान ने चांदी की पालकी मे शिव बारात निकालने की सलाह दी और रानी ने बनारस से डेढ़ क्विंटल चांदी की पालकी बनवाई,,जिससे आज भी शिव जी की बारात निकालने की परंपरा है,,और पंच धातु से बने शिव जी की पंचमुखी प्रतिमा भी स्थापित करते है,,



