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इस मंदिर की है एक अद्भुत कहानी विशाल काय वृक्षो से सजी माता रानी का दरवार यहां के लकड़ी चोरी करने पर देवी माता होती है नाराज देखते रही एक खास खबर DADDU DABANG.IN पर

इस मंदिर की है एक अद्भुत कहानी विशाल काय वृक्षो से सजी माता रानी का दरवार यहां के लकड़ी चोरी करने पर देवी माता होती है नाराज
देखते रही एक खास खबर DADDU DABANG.IN पर

शक्ति की आराधना का महापर्व नवरात्रि मंगलवार से प्रारंभ हो गया,, देश भर मे माता के विभिन्न रूपों का बड़े ही आस्था और विश्वास के साथ पूजा की जा रही,,और श्रद्धांलु देवी मंदिर मे अपनी मनोकामना लेकर पहुंच रहे है,,जांजगीर चाम्पा जिला भी नवरात्रि धूम धाम के साथ मनाया जा रहा है,,जांजगीर का एक मंदिर ऐसा भी है जहाँ माता का श्रृंगार गगन चुम्बी पेड़ पौधो ने की है,,और इस पेड़ो की रक्षा स्वयं माता रानी करती है,,इसी लिए इस स्थान को लोग सरई श्रृंगार के रूप मे जानते है,,आइये जानते है क्या है सरई श्रृंगार माता की महिमा

जांजगीर चाम्पा जिला मुख्यालय से महज 30 किलो मीटर की दूरी पर बलौदा ब्लाक मे स्थित है माँ सरई श्रृंगारिणी का मंदिर,,यहां चारो ओर विशाल काय वृक्षो से सजी माता रानी का दरवार श्रद्धालुओं को शीतलता और शांति प्रदान करती है,,माता रानी के प्रति श्रद्धालुओं का अनूठा विश्वास है और यहां चैत्र और क्वार नवरात्रि मे श्रद्धालु एक हजार से भी अधिक मनोकामना ज्योति कलश प्रज्ज्वलित कराते है और मंदिर के गर्भ गृह मे 35 साल से अधिक समय से अखंड ज्योत जल रहा है,,मंदिर मे आने वाले श्रद्धालुओं के अनुसार माता रानी का प्रमाण वर्षो पहले मिला,,जब भिलाई गाँव का एक व्यक्ति जंगल मे लकड़ी काटने गया और सरई की पेड़ को काटने के बाद उसे ले जाने गाड़ा लेकर पंहुचा लेकिन जब कटी हुई लकड़ी की तलाश की तब पता चला जिस लकड़ी को काटा था फिर से जुड़ गया है,,व्यक्ति ने फिर से उसे काटने का प्रयास किया और माता ने उसे अपनी उपस्थिति और लकड़ी नहीं काटने के सम्बन्ध मे संकेत दिया और फिर भी लकड़ी काटना बंद नहीं होने पर उस व्यक्ति का पूरा कुल ही उस भिलाई गाँव मे रहने लायक नहीं रहा,,उस घटना के बाद आसपास के लोग वन देवी की आराधना करने लगे और तब से पेड़ो की कटाई करने से डरते है

अनिल शुक्ला स्थानीय नागरिक

इस मंदिर के स्थान पर पहले झोपडीनुमा मंदिर था,,लेकिन भक्तो की श्रद्धा और विश्वास के कारण इस स्थान मे कई बड़े बड़े मंदिर का निर्माण हो चुका है, और एक भी पेड़ की कुर्बानी नहीं दी गई,,यहां के पुजारी कोई पंडित नहीं बल्कि यादव समाज से है,,और बडे ही श्रद्धा के साथ माता की पूजा कराते है और लोगो की खुशहाली की कामना करते है,,लोग अपनी मनोकामना पूर्ति के लिए मंदिर परिसर के पेड़ो मे लाल कपडे से नारियल बांधते है और मनोकामना पूरी होने पर ज्योति कलश प्रज्ज्वलित करते हैं

भगला यादव पुजारी

बलौदा वन परिक्षेत्र मे सरई श्रृंगार का अपना अलग ही स्थान है,, माता रानी के प्रभाव से इस क्षेत्र मे पेड़ो की अवैध कटाई पर पूरी तरह प्रतिबन्ध है,,वही विशाल काय वृक्षों से सजी माता रानी का मंदिर पर्यटन को भी बढ़ावा दे रही है,,मंदिर की प्रसिद्धि इतनी है कि माता रानी के दर पर छत्तीसगढ़ ही नहीं बल्कि मध्य प्रदेश,,महाराष्ट्र और ओड़िसा के श्रद्धालु मनोकामना ज्योति कलश की स्थापना कराते है

इस स्थान मे सरई के पेड़ के लोगो के आस्था का प्रमुख स्थल है, जहाँ माता के पूजा की जिम्मेदारी यादव समाज के लोगो द्वारा की जाती हैं,

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