नगमत का खेल और बैगाओ द्वारा अपने शिष्यों के कान मे मंत्र फूँकने के बाद आदमी बन गया सांप और कीचड मे लोटने लगा,,देखते रहिये एक खास खबर DADDU DABANG.IN पर

नगमत का खेल और बैगाओ द्वारा अपने शिष्यों के कान मे मंत्र फूँकने के बाद आदमी बन गया सांप और कीचड मे लोटने लगा,,देखते रहिये एक खास खबर DADDU DABANG.IN पर

नागपंचमी के अवसर पर जांजगीर चाम्पा जिला के ग्रामीण इलाकों मे नगमत का कार्यक्रम आयोजित किया गया,,जिसे देखने के लिए गांव के लोग इकट्ठा हुए और मंत्र की शक्ति का जीवंत प्रदर्शन देख कर अचंभित हो गए,,इस आश्चर्य का कारण आदमी को सांप के रूप मे लोटते और फिर से अपने वास्तविक रूप मे आते देखना ही था,,नगमत का ये खेल किसी फ़िल्मी सीन से कम नहीं था,,देखिए कैसे होता है नाग पंचमी पर आदमी कैसे बनता है सांप और कब ख़ाता है दूध लाइ
नाग पंचमी याने बैगाओ द्वारा सर्प मंत्र को वापस याद करने का दिन के रूप मे माना जाता है,,अपने गुरु से दीक्षा लेकर सर्प दंश से मुक्ति दिलाने वाले बैगा,, जांजगीर चाम्पा जिला मे नागपंचमी के दिन नगमत का आयोजन किया गया,,जिसमे बैगाओ के द्वारा अपने गुरु की गद्दी पीढ़ा मे सजाई गई और शिव जी के साथ नाग की पूजा अर्चना के बाद गुरु गद्दी को खुले आसमान मे लोगो के बीच स्थापित किया गया और गाजा बाजा के साथ गुरु का आह्वान किया गया,,और फिर शुरु हुआ नगमत का खेल,,और बैगाओ द्वारा अपने शिष्यों के कान मे मंत्र फूँकने के बाद आदमी बन गया सांप और कीचड मे लोटने लगा
जांजगीर के नवधा चौंक मे शाम होते ही लोगो की भीड़ जुटने लगी और मांदर झाँझ की धुन मे गुरु का आह्वान किया गया,, और बैगाओ की टोली हवन पूजन करने लगा,,बैगाओ ने अपने एक साथी के कान मे मंत्र का जाप किया और देखते ही देखते साधारण खड़ा हुआ व्यक्ति अचानक अपना व्यवहार बदल कर सांप की तरह जमीन मे लौटने लगा,,एक के बाद एक युवक सांप के रुप लेकर कीचड़ मे लोटते रहे और बैगाओ का समूह उन्हें फिर से उनके कान मे मंत्र की बोल डाल कर उन्हें वापस इंसानी रूप मे लाया गया और उन्हें दूध लाइ ख़िला कर शांत कराया गया,,नगमत के इस खेल को लोग देखने के लिए दूर दूर से पहुचे और मनोरंजन किया
गुहा राम कहरा ( बैगा )
गांव गांव मे बैगाओ की टीम प्राचीन गुरु से शिष्य को मिलने वाली मंत्र की परंपरा को आज भी बनाए रखे है,,और वे खुद भी मानते है कि जब पहले सर्प दंश के उपचार के लिए डाक्टर की कमी होती थी तब बैगाओ द्वारा विषैले सांप का उपचार नहीं हो पाता था तब मंत्र ही एक सहारा होता था और मंत्र से सर्प दंश का उपचार किया जाता था लेकिन अब डाक्टर की उपलब्धता और अस्पताल मे उपचार हो जाने के कारण मंत्र को संरक्षित करने के लिए शिष्य बनाने और नाग पंचमी के दिन मंत्र का ध्यान कराया जाता है



