छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने कहा श्रमिक को दें मुआवजा, बिलासपुर रेलवे लोको शेड में हुआ था हादसा

बिलासपुर: रेलवे लोको शेड में काम के दौरान रेलवे ठेका श्रमिक की हाईटेंशन वायर के संपर्क में आने से मौत हुई थी. मामले में हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. कोर्ट ने संबंधित ठेकेदार को मृतक के परिजनों को 5 लाख मुआवजा देने का निर्देश दिया. यह मुआवजा राशि 6 हफ्ते के भीतर देने का निर्देश कोर्ट ने दिया है.

कोर्ट ने कहा कि 6 हफ्तों के भीतर दें मुआवजा: सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि छह हफ्तों के भीतर पीड़ित परिवार को मुआवजा दिया जाए. दरअसल बीते दिनों ट्रेन की बोगी में लगे एसी को ठीक करने के दौरान ठेका श्रमिक हाईटेंशन वायर की चपेट में आ गया. गंभीर हालत में श्रमिक के साथी उसे अस्पताल लेकर गए. अस्पताल में श्रमिक की मौत हो गई.

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने लिया था स्वत: संज्ञान: इस दर्दनाक घटना के बाद मृतक श्रमिक ठेकेदार के साथियों और परिवार वालों ने मुआवजे की मांग की. पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए साथी कर्मचारियों ने प्रदर्शन भी किया. मृतक की पत्नी ने भी आर्थिक मदद की मांग की. दरअसल मृतक ठेका श्रमिक घर का इकलौता कमाने वाला शख्स था. पूरा परिवार उसी की आय पर आश्रित था. अदालत ने लिया स्वत: संज्ञान लेकर इस मामले की सुनवाई की. सुनवाई के दौरान रेलवे की ओर से कोर्ट को बताया गया कि पीड़ित के परिवार को रेलवे की ओर से पहले ही 16 लाख 40 हजार का मुआवजा दिया जा चुका है.

परिजन मांग रहे 1 करोड़ का मुआवजा: बिलासपुर रेलवे कोचिंग डिपो में ओएचई तार के संपर्क में आने से ठेका मजदूर की मौत हो गई थी. पिछले 4 दिनों से उसका शव मॉर्च्यूरी के फ्रीजर में रखा हुआ है. करंट से झुलसने और पीएम के बाद लाश सड़ने की आशंका जताई जा रही है. दूसरी तरफ परिजन और पीड़ित परिवार के समाज के लोग1 करोड़ का मुआवजा और नौकरी की मांग पर अड़े हैं. डीआरएम ऑफिस के बाहर उनका धरना और प्रदर्शन पिछले 6 दिनों से जारी है. आज हाई कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई करते हुए पांच लाख मुआवजा देने के निर्देश दिए.

कैसे हुआ हादसा: दरअसल, 23 अगस्त को रेलवे के कोचिंग डिपो में वंदे भारत के एक्स्ट्रा कोच के एसी की सफाई और मरम्मत की जा रही थी. इसी दौरान जांजगीर चांपा जिले के पामगढ़ निवासी ठेका श्रमिक प्रताप बर्मन ओएचई तार की करंट की चपेट में आ गया. करंट की चपेट में आते ही प्रताप बर्मन बुरी तरह झुलस गया. इस हादसे के बाद उसे अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया. इस दौरान ठेकेदार और रेलवे प्रशासन ने मजदूर के इलाज में कोई मदद नहीं की, जिससे गुस्साए परिजन 26 अगस्त से डीआरएम ऑफिस का घेराव कर धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया. 28 अगस्त को मजदूर की इलाज के दौरान मौत हो गई. रेलवे प्रशासन के रवैये से परिजनों में गुस्सा है. परिजन उचित मुआवजा देने की मांग पर अड़े हैं.

 

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