राज्य एवं शहर

डीजे के दौर में सिमट रही गुदुम बाजा की परंपरा,चाम्पा में घटती जा रही कलाकारों की संख्या

जांजगीर चाम्पा जिले में कभी ओडिशा का प्रसिद्ध गुदुम बाजा शादी-विवाह और धार्मिक आयोजनों की पहचान हुआ करता था,,लेकिन अब समय के साथ इसकी चमक फीकी पड़ती जा रही है,,काले रंग का गोल और ढोलक जैसा दिखने वाला यह खास बाजा हाथों और कोहनी से बजाया जाता है,,जिसकी आवाज लोगों को खूब आकर्षित करती थी।

कई दशक पहले तक अक्षय तृतीया के एक माह पहले ही चाम्पा के रामबांधा तालाब के पास ओडिशा से 50 से ज्यादा गुदुम बाजा कलाकारों की टोलियां पहुंच जाती थीं,,यहां वे पीपल के पेड़ के नीचे डेरा डालते थे और लोग शादी या धार्मिक कार्यक्रमों के लिए उन्हें बुक कर अपने घर ले जाते थे,,खास बात यह थी कि ये कलाकार पूरे कार्यक्रम के दौरान घर में रहकर गाना-बजाना करते थे,,जिससे आयोजन में अलग ही रौनक रहती थी,,लेकिन अब हालात बदल चुके हैं,,गांव-गांव में डीजे,,ताशा और अन्य आधुनिक साउंड सिस्टम आसानी से उपलब्ध हो गए हैं,,जिससे गुदुम बाजा की मांग काफी कम हो गई है,,इसका सीधा असर कलाकारों पर पड़ा है,,जहां पहले 50 से ज्यादा टीमें आती थीं,,अब गिनी-चुनी टीमें ही चाम्पा पहुंच रही हैं,,ओडिशा से हर साल आने वाले कलाकार बताते हैं कि पहले सभी को आसानी से काम मिल जाता था,,लेकिन अब डीजे के बढ़ते चलन के कारण उनकी जरूरत कम हो गई है,,इसके बावजूद वे हर साल अपनी परंपरा और उम्मीद के साथ चाम्पा आते हैं,,गर्मी के मौसम में काम की कमी के चलते ये कलाकार अक्षय तृतीया के मौके पर कमाई की आस लेकर यहां पहुंचते हैं,,करीब एक महीने तक रुककर ग्राहक ढूंढते हैं और बुकिंग मिलने पर तय समय पर शादी घर जाकर अपनी कला का प्रदर्शन करते हैं,,कम मांग और बदलते समय के बावजूद ये कलाकार अपनी परंपरा को जिंदा रखे हुए हैं,,हालांकि,अगर यही स्थिति रही तो आने वाले समय में गुदुम बाजा जैसी पारंपरिक कला सिर्फ यादों तक ही सीमित होकर रह सकती है।

Related Articles

Back to top button
error: Content is protected !!