छत्तीसगढ़ की पारम्परिक त्यौहार किसानी परंपरा और दोस्ती का अनूठा त्यौहार,,भोजली से धान की पैदावार का अंदाजा लगाते है किसान,,स्थानीय कलाकारों ने झांकी भी निकाली,,देखते रहिये एक खास खबर DADDU DABANG.IN पर

छत्तीसगढ़ की पारम्परिक त्यौहार किसानी परंपरा और दोस्ती का अनूठा त्यौहार,,भोजली से धान की पैदावार का अंदाजा लगाते है किसान,,स्थानीय कलाकारों ने झांकी भी निकाली,,देखते रहिये एक खास खबर DADDU DABANG.IN पर

छत्तीसगढ़ को धान का कटोरा यू ही नहीं कहा जाता,,यहां की तीज त्यौहार और परम्परा अपने आप मे अनूठा है,,इस पारम्परिक त्यौहार मे एक है भोजली का त्यौहार,,जिसे जांजगीर चाम्पा जिले मे धूमधाम के साथ मनाया गया,,और बालिकाएं एक दूसरे को सखी बनना कर आजीवन मित्रता निभाने का संकल्प लिया,,वही किसान भोजली के उपज से आने वाले धान के उपज की आंकलन कर खुश है
छत्तीसगढ़ मे रक्षा बंधन के दूसरे दिन भोजली का त्यौहार हर्षोल्लास के साथ मनाया गया भोजली को छत्तीसगढ़ मे मितान तिहार के रुप मे भी जाना जाता है,, आज जांजगीर चाम्पा जिला मे भोजली उत्सव के अवसर पर गांव गांव मे भोजली विसर्जन का आयोजन किया गया,,पेण्ड्री गांव मे बेटियों के साथ महिला पुरुष गाजा बाजा के साथ भोजली विसर्जन करने निकले,, स्थानीय कलाकारों ने आल्हा और उदल राजा के कहानी से जुडी झांकी निकाली और भोजली को देवी गंगा के सामान पवित्र बताते हुए गुणगान किया
रामाधीन यादव ( कलाकार )
भोजली याने गेहूं या चांवल को अंकुरित कर नाग पंचमी के दिन अंधेरे कमरे मे रख कर उगाया गया फसल होता है,,महिलाए इसे देवी देवता की तरह पूजा करते है और सुबह शाम हल्दी पानी का छोड़काव कर धुप दीप दिखाते है और भजन भी करती है,,वही राखी के दूसरे दिन शाम को गांव की सभी महिलाये चौंक मे इकट्ठा होकर विसर्जन करने तालाब के लिए गाजा बाजा के साथ निकली गांव के बुजुर्ग इस परम्परा को जात पात,,ऊंच नीच की भावना से परे बताते है,,और गांव की एकता के लिए ऐसे त्यौहार को महत्व पूर्व बताते है,,गांव के बुजुर्ग बिसून कश्यप ने बताया कि भोजली देकर बड़ो का सम्मान करते है,,बेटियां एक दूसरे से मितान बनाती है और किसान भोजली के ऊंचाई और उसके रंग को देख कर अपने धान की फसल का अंदाजा लगा लेते है
गेंद बाई ( स्थानीय महिला )
बिसुन कश्यप ( गांव के प्रमुख नागरिक )
छत्तीसगढ़ का पारम्परिक त्यौहार भोजली गाँव के एकता और बेटियों के सम्मान के लिए पुराने समय से आयोजित किया जा रहा है,,कहीं आल्हा उदल द्वारा अपनी बहनो के सम्मान की रक्षा के लिए किए गए उपाय को आज भी प्रदर्शन किया जाता है और इस परम्परा को आगे भी चलाते रखने के लिए युवा वर्ग को जानकारी देते है



