चंडी दाई की महिमा से गूंजता है पामगढ़ का चंडीपारा गांव

छत्तीसगढ़ की धरती गढ़ों और परंपराओं के लिए मशहूर है,इन्हीं गढ़ों में से एक है पामगढ़ का चंडीपारा गांव,जहाँ आज भी चंडी दाई की प्राचीन प्रतिमा विद्यमान है,गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि इसी देवी के नाम पर इस गांव का नामकरण चंडीपारा किया गया,ग्रामीणों और श्रद्धालुओं का विश्वास है कि माता चंडी दाई सच्चे मन से की गई हर मनोकामना को पूर्ण करती हैं।
लगातार बढ़ रही है श्रद्धालुओं की भीड़
माता की महिमा को देखते हुए यहां आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है,आसपास के ही नहीं बल्कि दूर-दराज़ के गांवों से भी लोग दर्शन के लिए पहुंचते हैं,खास बात यह है कि जब किसी भक्त की मनोकामना पूरी होती है तो वे आभार स्वरूप यहां 500 से भी अधिक ज्योति कलश की स्थापना करते हैं,नवरात्रि में सजता है विशेष उत्सव,चंडीपारा गांव में दोनों नवरात्रियों पर विशेष पूजा-अर्चना की जाती है,इन दिनों मंदिर परिसर का माहौल बेहद भक्ति-मय हो जाता है,ढोल-नगाड़ों की गूंज,माता के जयकारे और भजन-कीर्तन से पूरा गांव जीवंत हो उठता है,श्रद्धालु पूरी रात माता की भक्ति में लीन रहते हैं।
आस्था और परंपरा का संगम

ग्रामीण बताते हैं कि चंडी दाई का मंदिर सिर्फ एक पूजा स्थल ही नहीं,बल्कि पूरे क्षेत्र की आस्था और परंपरा का केंद्र है,यहां हर साल आयोजित अनुष्ठानों में सभी जाति और समुदाय के लोग बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं,चंडीपारा गांव इस तरह छत्तीसगढ़ के उन खास धार्मिक स्थलों में गिना जाता है,जहाँ आस्था,विश्वास और परंपरा का अद्भुत संगम देखने को मिलता है।



