रिटायरमेन्ट के बाद आप क्या करना चाहते है पारिवारिक जीवन बिताना या किसी की सेवा मगर किसकी सेवा *देखिए एक खास खबर DADDU DABANG.IN पर*

रिटायरमेन्ट के बाद भाग दौड़ और व्यस्तम जिंदगी को छोड़ कर अपने जीवन परिवार के साथ बिताने की सोचते हैं लेकिन कुछ ऐसे लोग भी है जो रिटायरमेन्ट के बाद अपने आप को प्रकृति के सेवा में लगा देते है
इसे प्रकृति के प्रति प्रेम कहे या कुछ कर गुजरने के लिए जूनून,,लोग रिटायरमेन्ट के बाद भागदौड़ और व्यस्तम जिंदगी को छोड़ कर अपने जीवन परिवार के साथ बिताने की सोचते हैं,,लेकिन कुछ ऐसे लोग भी है जो रिटायरमेन्ट के बाद अपने आप को प्रकृति के सेवा में लगा देते है,, ऐसा ही एक नाम है बिर्रा के हीरा लाल कश्यप का,,जिन्होने अपने नौकरी की सेवा समाप्त कर गाँव लौटे और अपने लिए पेड़ पौधे के साथ एक नया जहाँ बना लिया है और अधिकांश समय इसकी ही सेवा में लगाते है,, आइये जानते है हीरा लाल कश्यप की बाडी कब और कैसे तैयार हुई और क्या है इसकी खासियत,,
जांजगीर चाम्पा जिला के बम्हनीडीह ब्लाक के बिर्रा गाँव इस दिनों किसान ही नहीं बल्कि आम लोगो के आकर्षण का केंद्र बन गया है,,यहां के किसान हीरा लाल कश्यप दो एकड़ खेती भूमि को पेड़ पौधे और औषधि पेड़ो लिए सुरक्षित कर दिया है,,इस बाड़ी में ना केवल देशी फल फूल लगे है बल्कि विदेशी पेड़ की विभिन्न प्रजाति का संग्रहण लोगो को अपनी ओर आकर्षित करता है,,यहां कश्मीर के सेव की अलग अलग प्रजाति के 250 पेड़ फल फूल रहे है,,तो विदेश आम की 80 से अधिक प्रजाति अभी बैराए है,,इसके अलावा अमरुद,,केला,,बेर,, अनानास के विदेश प्रजाति फल रहे है,,
महानदी कोल फिल्ड ओड़िसा में इलेक्ट्रिकल फोर मेन के पद से रिटायर होने के बाद अपने गाँव लौटे हीरा लाल कश्यप ने अपने बच्चों को व्यवस्थित करने के बाद खुद खेती किसानी करने की तैयारी की लेकिन उन्होंने पारम्परिक खेती से हट कर कुछ नया करने का सोचा और यू ट्यूब और टी वी के खेती किसानो कार्यक्रम देख कर पेड़ पौधे लगाने की तैयारी की और 3 साल पहले अपने खेत को नई मिट्टी से पाट दिया और कोलकाता के नर्सरी और कश्मीर और हिमाचल जा कर वहां से भी सेव के कलम खरीद कर लाय और लगाया,,काफी जतन करने के बाद अब सेव,,आम और विदेश फलो का पेड़ तैयार हो गया है और फूल लगना भी शुरू हो गया है,, जिसमे हरिमन 99,, समर एप्पल,,गोल्ड़न डोरसेट,,ट्रेपिकल स्वीट और अन्ना पेड़ लगे है,,कलम पेड़ लगाने के के कारण इनकी ऊचाई मात्र 3 फ़ीट ही है लेकिन इसका फूल किसी बड़े वृक्ष से कम नहीं है,,इस पौधो में रासायनिक खाद का बिल्कुल भी प्रयोग नहीं करते,,बल्कि गोबर खाद और जीवाश्मा का उपयोग करते है,, जिसके कारण फलो और साक सब्जी भी पौष्टीकता से भरपूर रहता है,,
हीरा लाल कश्यप की प्रकृति प्रेम से आज बिर्रा क्षेत्र को जांजगीर जिला ही नहीं बल्कि दूसरे जिले में जानने लगे है और अपनी पहचान बनाने में जुटे है,,किसान हीरा लाल कश्यप के बाडी में लगे एक पेड़ का कलम एक हजार रूपये से लेकर 5 हजार रूपये के लगे है,,जिसका फल ढाई लाख रूपये किलो तक विदेशो में बिक्री होता है,,वही एक एक आम का वजन 5 किलो,,4 किलो के भी होते है,,हीरा लाल कश्यप अपने मेहनत सवारे इस बाग़ का फल पहले अपने परिवार,, रिस्तेदार और आने जाने वालो को खिलाने की तैयारी में है और आगे इसको व्यापारिक स्वरुप देने की सोच रखते है,,हीरा लाल कश्यप ने अपने बाडी में अब नर्सरी भी तैयार करना शुरू कर दिए है और यहां आने वालो को दो पेड़ लगाने के लिए प्रेरित करते हुए पौधे भेट करते है,,



