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राज्य एवं शहर

जांजगीर चांपा में उद्योगों पर करोड़ों का जल कर बकाया,जिला पंचायत ने खोला मोर्चा

जांजगीर चांपा जिले में संचालित बड़े उद्योगों पर करोड़ों रुपये का जल कर बकाया होने का मामला अब गरमा गया है,,जल संसाधन विभाग द्वारा कई बार नोटिस जारी किए जाने के बावजूद उद्योगों ने अब तक बकाया राशि जमा नहीं की है,,इस पूरे मामले को लेकर अब जिला पंचायत के जनप्रतिनिधियों ने सख्त रुख अपनाते हुए विभाग पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

जिला पंचायत अध्यक्ष सत्यलता आनंद मिरी ने साफ कहा है कि सामान्य सभा की बैठकों में जल संसाधन विभाग द्वारा बार-बार अधूरी और गलत जानकारी दी जा रही है,,उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि अगली बैठक में पूरी और सही जानकारी के साथ उपस्थित हों,,उन्होंने यह भी कहा कि पहले भी दी गई जानकारी में भारी त्रुटियां थीं,,जिन्हें सुधारने के लिए कहा गया था,,लेकिन दो बैठकों के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है,,इस मुद्दे पर जिला पंचायत सदस्यों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है,,बीजेपी और कांग्रेस, दोनों ही दलों के सदस्यों ने अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं,,कांग्रेस समर्थित सदस्य लोकेश राठौर ने आरोप लगाया कि अधिकारी सामान्य सभा को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं और गलत जानकारी देने के बाद भी उसे सुधारने में कोई रुचि नहीं दिखा रहे,,उन्होंने यह भी कहा कि यदि यही रवैया जारी रहा तो आंदोलन कर अधिकारियों का विरोध किया जाएगा,,जिले में स्टील इंडस्ट्री,,पावर प्लांट और कोल वॉशरी जैसे कई बड़े उद्योग संचालित हैं,,जिन्हें महानदी और हसदेव नदी से पानी की आपूर्ति की जाती है,,इसके बदले इन उद्योगों को शासन को जल कर देना होता है,,लेकिन विभाग की जानकारी के अनुसार,,जिले में केवल 6 उद्योग ही ऐसे हैं जिन पर कोई बकाया नहीं है,,जबकि एक दर्जन से अधिक उद्योगों पर करोड़ों रुपये का जल कर बाकी है,,गौर करने वाली बात यह है कि इतने बड़े बकाया के बावजूद विभाग ने अब तक केवल नोटिस जारी करने तक ही कार्रवाई सीमित रखी है,,इसी को लेकर जिला पंचायत के सदस्य अब विभाग को घेरने की तैयारी में हैं,,उनका कहना है कि यदि सही और पूरी जानकारी सामने आती है,,तो इस मामले में बड़ा खुलासा हो सकता है।
फिलहाल,,यह मुद्दा जिले की राजनीति और प्रशासनिक हलकों में चर्चा का केंद्र बन गया है और आने वाले समय में इस पर और भी बड़ा विवाद खड़ा होने की संभावना जताई जा रही है।

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