क्या आप जानते है किन्नरो की शादी कैसे होती है,,अगर नहीं तो देखिये चाम्पा के धर्मशाला में आयोजित तीन दिवसीय कार्यक्रम में आखिर किससे हुआ 5 किन्नरो का विवाह
जांजगीर चाम्पा जिला के किन्नरों ने पहली बार लोक कल्याण के लिए 3 दिवसीय कार्यक्रम का आयोजन किया,,इस आयोजन में पहले दिन अपने आराध्य देव बहुचरा माता की पूजा अर्चना के साथ की और दूसरे दिन सोमवार को माता के सामने हल्दी रस्म और तीसरा दिन याने बुधवार को प्रदेश भर से पहुचे किन्नर कलश यात्रा निकाल कर लोक हित की कामना करेंगे,,वैसे तो हर माता पिता का सपना होता है कि उसके बेटे बेटियों का रीति रीवाज के साथ विवाह कर अपने घर बहु लाये या बेटी को दामाद से साथ विदा करें लेकिन थर्ड जेन्डर याने किन्नरों कि शादी कि बारे में सोचा भी नहीं जाता,,धीरे धीरे किन्नरो के लिए भी क़ानून बने और उन्हें भी समानता का अधिकार मिला लेकिन क्या आप जानते है किन्नरो की शादी कैसे होती है,,अगर नहीं तो हमारे साथ देखिये चाम्पा के धर्मशाला में आयोजित तीन दिवसीय कार्यक्रम में आखिर किससे हुआ 5 किन्नरो का विवाह,,रविवार को बहुचरा माता की पूजा अर्चना में बाद पाँच किन्नर माही,,ज्योति,, रानी, काजल,,सौम्या,, की शादी का भी रस्म निभाया गया,,जिसमे बाकायदा उनके परिवार के लोग भी शामिल हुए और सभी किन्नरों के शरीर में तेल हल्दी चढ़ाया गया और उनका विवाह उनके ही किन्नर गुरु शारदा नायक से कराने की रस्म की गई,,किन्नरों के इस विवाह में वे वधु की तरह साड़ी पहन रखी थी वही वर के रूप में भी हाथ में कटार लेकर हल्दी हल्दी रस्म को पूरा किया,,इन किन्नरो में माहि ने ग्रेजुएशन तक की शिक्षा ली है और अपने इस रूप को ही अपना सहारा बना कर अन्य किन्नरों को अपने इज्जत की जिंदगी देने के लिए प्रेरित कर रही है,, माहि ने बताया कि किन्नर भी मनुष्य के अंग है और उन्हें भी अपनी जिंदगी जीने का अधिकार है,,जो सभी महिला पुरुष करते है उस वैवाहिक रस्म को भी किया जा रहा ही,, और जिनकी आज शादी हो रही है वे अपने गुरु से शादी कर रहे है और अब गुरु के नाम की ही सिंदूर और श्रृंगार करेंगे,,इस आयोजन में किन्नरों के परिजन भी आए है और शादी के इस रस्म का आनंद ले रहे है,,किन्नरों के इस विवाह में अब उनके परिजन भी शामिल होने लगे है,, उनका कहना है कि इसे देख कर ख़ुशी भी हो रही है और दुखी भी है,,जिस बेटे की शादी कर बहु लाने की चाहत थी उसके इस रूप को देखकर दुख होता है लेकिन अपने बेटए की इस रूप को भी स्वीकार कर उनकी ख़ुशी में शामिल होने की ख़ुश है परिजनों ने कहा कि तीन दिनों के इस आयोजन में देवी की पूजा के साथ हल्दी रस्म, डांस और भोज का आयोजन और लोक कल्याण के लिए कलश यात्रा एक सुखद अनुभव है,,